सनातन धर्म में रंगों की पहचान और महत्ता वैदिक काल में ही कर ली गई थी. विभिन्न रंगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सनातन काल से रंगों का प्रयोग किया जाता रहा है. भगवा रंग मूल प्राकृतिक रंग नहीं है बल्कि यह लाल और पीले रंग का मिश्रण है क्योंकि यह दोनों ही रंग मनोवैज्ञानिक रूप से अत्यंत प्रभावी हैं , इसलिए भगवा रंग सनातन संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन गया.
भगवा रंग लाल और पीले दो प्राकृतिक रंगों से मिलकर बना है जिनका अलग-अलग महत्व है. जहां लाल रंग सौभाग्य, उत्साह और उमंग का प्रतीक है, पीला रंग रोशनी का प्रतीक है और यह सूर्य, मंगल और देवताओं के गुरु बृहस्पति का प्रतिनिधित्व करता है. दोनों रंगों का अत्यंत वैज्ञानिक महत्व है. लाल और पीले दोनों रंग मिलकर अग्नि का रंग बनाते हैं जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र स्थान दिया गया है.
सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों ही भगवा रंग के होते हैं, यह जीवन की शुरुआत और जीवन का अंत दोनों ही भगवा समर्पित हैं . सनातन धर्म के अनुसार भगवा रंग शौर्य और पराक्रम का भी प्रतीक है इसलिए आदि काल से भगवा रंग का प्रयोग धर्म ध्वजा के रूप में भी किया जाता है.
हमारे राष्ट्रीय ध्वज में भी भगवा रंग का इस्तेमाल किया गया है जिसे केसरिया रंग के नाम से जाना जाता है, जो मूलत: और स्वभावत: चटक भगवा रंग ही है.
भगवा रंग या गेरुआ रंग त्याग, वैराग्य , बलिदान, ज्ञान, शुद्धता, संकल्प,संयम , आत्म नियंत्रण एवं सेवा का प्रतीक है। इस रंग के वस्त्र व्यक्ति को हमेशा याद दिलाते हैं कि उसने सांसारिक सुख और वैभव को त्याग दिया है, और सनातन धर्म के रास्ते पर चलकर मानव मात्र की सेवा का व्रत लिया है.
इसलिए भगवा रंग गेरुआ रंग के कपड़े सिर्फ सन्यासी ही पहनते हैं और गृहस्थ केवल पूजा, और धर्म कर्म के अवसर पर ही ऐसे वस्त्र पहनते हैं.
चूंकि योगी आदित्यनाथ एक सन्यासी हैं, और गुरु गोरक्षनाथ पीठ, गोरखपुर के पीठाधीश्वर भी हैं, वह ऐसे वस्त्र उस समय से धारण कर रहे हैं जब से वह सन्यासी बने थे.
गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर में पीठाधीश्वर निवास में भी सभी तरह के वस्त्र भगवा रंग के ही मिलेंगे, चाहे वह पर्दे हो, सोफों और कुर्सियों के कवर हों या कुछ और, किंतु वहां किसी भी तरह के रंगीन या अन्य रंग के वस्त्र नहीं मिलेंगे.
स्वाभाविक है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री निवास और कार्यालय दोनों जगह भगवा रंग इस्तेमाल होता है. यहां तक कि अपने कार्यालय के बाहर किसी समीक्षा बैठक में भी वह होते हैं तो भी इस बात का ध्यान रखा जाता है जिस कुर्सी या सोफे पर बैठे उसके कवर आदि भगवा रंग के ही हो. एक और गूढ़ बात है अन्य सन्यासियों की तरह योगी आदित्यनाथ ने भी सन्यासी बनते समय अपना पिंड दान कर दिया था इसलिए सनातन धर्म के अनुसार अब वह किसी दूसरे रंग के वस्त्रों का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.
फोटो गूगल
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