कोई भी व्यक्ति हर समय हर विषय पर सही राय नहीं दे सकता और बहुत स्वाभाविक है उसकी अपनी राय भी हमेशा सही नहीं हो सकती। हाल ही में मुंबई में हुए एक समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए गुलजार ने बातों ही बातों में नए नागरिकता संशोधन कानून के विषय में भय की भावना का इजहार किया और केंद्र सरकार पर तंज कसा। लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं अपनी बात "मित्रों" करके करना चाहता था लेकिन मैंने अपने को रोक लिया। "मित्रों" का संबोधन मोदी जी से टैग किया जाता है और इसलिए संभवत: उन्होंने इस शब्द को स्तेमाल नहीं किया, इसलिए क्योंकि मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने इस कानून को बनाया है।
गुलजार ने ऐसे विषयों पर कभी कोई अनावश्यक टिप्पणी नहीं की जिनमें उनके समकालीन जावेद अख्तर सरीखे कई लोगों ने टिप्पणियां करके अनावश्यक विवाद को जन्म दिया । लेकिन नागरिकता संशोधन कानून पर अपनी अप्रत्यक्ष असहमति व्यक्त कर गुलजार ने संभवत: अपनी ही परंपरा तोड़ दी है।
नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध आंदोलन करने वाले ज्यादातर यह तर्क देते हैं कि यह कानून मुस्लिम विरोधी है । स्वभाविक है मुस्लिम वर्ग के वे लोग जो कार्यपालिका न्यायपालिका और संवैधानिक पदों पर आसीन है और सभी समुदाय के ऐसे लोग जो समाज के सभी वर्गों के लोगों के दिलों पर राज करते हैं, इस समस्या में सकारात्मक सहयोग कर सकते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से ही सही अगर किसी भी राष्ट्रीय समस्या पर वे एक तरफा राय दें तो इसके परिणाम हमेशा नकारात्मक होते हैं । अभी बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए जब तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सेवानिवृत्त होते समय कहा था कि हिंदुस्तान के मुसलमान डरे हुए हैं। ऐसा लगा जैसी एकबारगी उन्होंने हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोगों को, खासतौर से हिंदुओं को बिना वजह अपमानित कर दिया है। देश को अभी ये भूलने में बहुत समय लगेगा।
गुलजार स्वयं पाकिस्तान से बंटवारे के बाद हिंदुस्तान आए थे और इस देश के विभाजन की त्रासदी उन्हें बहुत अच्छी तरह से मालूम है। अभी संपर्कों, दोस्तों और रिश्तेदारों के माध्यम से निश्चित रूप से उन्हें यह भी मालूम होगा है कि जहां से वह आए थे वहां आज जो अल्पसंख्यक यदि बचा है तो उसके क्या हाल है? ये कानून भले ही संप्रदायिक लगता हो, किंतु संप्रदायिकता की मार झेलने वाले और बेचारगी की जिंदगी जी रहे, बमुश्किल अपनी जान बचाकर भागे असहाय लोगों के लिए एक सम्मानित जिंदगी जीने का कारण बन सकता है।
गुलजार जी से यह अपेक्षा उनके हिंदू होने के कारण नहीं है बल्कि इसलिए है कि उनकी कही किसी भी बात का समाज में गहरा प्रभाव होगा। अगर हम किसी समस्या के समाधान में सहायक ना हो पाए तो कम से कम स्वयं उस समस्या के लिए समस्या न बने। इसका ध्यान गुलजार जैसे लोगो को रखना चाहिए।
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- शिव मिश्रा
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