यह बहुत दुर्भाग्य पूर्ण है कि बार बार स्पष्टीकरण के वाबजूद ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि नागरिकता संशोधन कानून से अल्पसंख्यको की नागरिकता छिन जायेगी . परिणाम स्वरूप जगह जगह अल्पसंख्यको के एक बहुत छोटे से वर्ग द्वारा जो पहले से ही तीन तलाक, अयोध्या निर्णय, धारा ३७० आदि की वजह से हासिये पर आ गया है और उनके आय के श्रोत प्रभावित हो गए हैं , प्रदर्शन और हिंसा को भड़काने का काम कर रहे हैं . पूर्वोत्तर में प्रधान मंत्री के आह्वाहन पर शांति कायम होती दिख रही है किन्तु इसके विपरीत पश्चिम बंगाल और दिल्ली में हिंसा और आगजनी बढ़ती जा रही है . दुर्भाग्य से ये दोनों ही राज्यों में निकट भविष्य में चुनाव होने वाले हैं इसलिए वोटो की फसल को एकमुश्त काटने के लिए कुछ राजनैतिक दलों के बीच प्रतियोगिता भी शुरू हो गयी है.
दिल्ली में जामिया इलाके में प्रदर्शन हिंसक हो गया और कई बसों और सार्वजानिक संपत्ति को आग के हवाले कर दिया गया और पुलिस बालों पर पथराव किया गया . एक राजनैतिक दल के विधान सभा सदस्य का भडकाने वाला विडिओ सामने आया है . समय की मांग है कि प्रदर्शनों को सख्ती से निपटा जाय और सार्वजानिक संपत्ति को बचाया जाय.जामिया मिलया पर संदेह करना तो उचित नहीं पर अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. जेएनयूं पर भी निगाह रखने की जरूरत है ताकि अनावश्यक विवाद बढ़ने से रोका जाय . दिल्ली पुलिस के अनुसार एक विशेष तरह की भीड़ पूरी तैयारी के साथ आयी जिसने पुलिस के आदेश को मानने से इंकार कर दिया और आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया .
ऐसा लगता है कि कुछ राजनैतिक दलों का खुला समर्थन हासिल है इन देश विरोधी गतविधियों को बढाने के लिए . इससे पहले कि पानी सिर के ऊपर निकल जाए , पुलिस को सख्ती से इसे रोकना चाहिए .
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